08 January 2006

शब्द प्राणायाम - 86 - 90

बढ़ावा


भ्रष्ट,
राजनीति और नेता
देश को
किस तरफ ले जा रहे हैं,
बच्चे की तरह दूध
आतंकवाद को
पिला रहे हैं !














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आशा


उन घरों में भी
कभी मौज मस्ती होगी
जिस दिन
आदमी की नहीं
शराब की,
मौत होगी !















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दुर्लभ प्रजाति


देश में,
बिजली का टोटा
क्या हो गया,
आज
विलुप्त एवं दुर्लभ प्रजाति
कीड़ा,
बिजली का हो गया है !
















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शर्म


हल्ला,
पानी बचाओ.....बचाओ का
उस तक भी
पहुँच गया,
बेचारा
बिना टोंटी का नल भी
बंद हो गया !















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परख


कसौटी पर
परखने का रिवाज़
आदमी ने निकाला है,
आज तक,
आदमी-आदमी को
नहीं समझ पाया है !















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-रमेशकुमार भद्रावले

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