05 January 2006

शब्द प्राणायाम - 81-85

जीत


गुलाल, माथे का
चिह्न, बनकर
दिल पर
उभर आता है,
तभी नेता
जनता के बीच
होली मनाता है !














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दर्शन


फूटकर अंडा
कितना उजाला
कर जाता है,
बाँग देकर मुर्गा
आज भी
सूरज को
जगाता है !














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शामिल


जाने दो,
बच्चा है, बूढ़ा है,
इस कतार को
आगे बढ़ाना होगा,
कुछ भी कर डाले
माफ हमें अब,
नेता को भी करना होगा !















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गंदी मछली


सूख कर
हज़ारों की
जान ले लेता है,
तालाब हमेशा
बदनाम,
मछली को करता है !















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मतलब


पत्नी,
यहाँ अपंग 'त' को
अक्षर 'न', ने सँभाला है,
भाषा के लिये
अक्षरों को
विकलांग,
आदमी ने बनाया है !













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-रमेशकुमार भद्रावले

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