08 January 2006

शब्द प्राणायाम - 96 - 101

मतदान

पन्द्रह दिन की
निराई-गुड़ाई में
वर्षो की
फ़सल पैदा करता है,
आज आदमी
खेत में नहीं,
चुनाव में मेहनत
करता है !
















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सच्चाई - २


पाल कर कुत्ता
आदमी,
भौंकना तो सीख गया है,
वफादारी से
क्यों, आज
पीछे हट गया है !











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सायफन


पानी और आदमी का
पल-पल का साथ है
काश !
पानी का सिर्फ एक गुण
आदमी मे आ जाता,
आज,
आदमी, आदमी की सतह
बराबर कर पाता !











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बचाव


दिल तक
दुल्हन,
सास-ससुर के
पहुँच जाती है,
ज़िद करके बाप से
जब दहेज,
खूब लाती है !











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लज्जा


लज्जा जैसा आभूषण
नारी का,
आज नहीं खोता,
यदि
साड़ी में
जेब होता !











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लकीरें



लक्ष्मण रेखा से
रेखाओं का सिलसिला
आज तक
चला आ रहा है,
ग़रीबी रेखा से
ग़रीब
बाहर ही नहीं आ रहा है !










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-रमेशकुमार भद्रावले
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