शब्द प्राणायाम- 06-10
चींटी और कबूतर
तिनके का सहारा देकर
डूबती चींटी को
कबूतर ने बचा लिया,
स्वार्थ की एक बूँद में
आज
डूब गया है आदमी

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उल्कापात
धूम्रपान,
कभी-कभी
चाँद तारे भी करते हैं,
ऐश-ट्रे
समझकर गुल
धरती पर
गिरा देते हैं!

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साँचा
तराशी हुई
संस्कृति
दो शब्दों में
सँवर गई,
कर्त्तव्य में रामायण
कर्म में,
गीता ढल गई!

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कर्म
बादल,
अँगुलियों की मेहनत के
जब,
उमड़-घुमड़ के आते हैं
लक्ष्मी के फोटो जैसी
दौलत,
हथेली से बरसाते हैं!

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कटौती
देश को
फिर से हमें
सोने की चिड़िया
बनाना है,
कटौती के स्र्प में
चिड़िया के पर
नहीं लगाना है!

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बाल-विवाह
चलन,
बाल-विवाह का
समाज में
क्या हो गया,
अंडे से निकला चूजा,
दूल्हा हो गया !

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-रमेशकुमार भद्रावले
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