18 December 2005

शब्द प्राणायाम- 01-05

प्राणायाम

घोंघा,
बीमारियों का
जीवन-समुद्र में
चलता है,
स्वास्थ्य जैसा
मोती,
योग और प्राणायाम की
सीपी में,
पलता है!














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अकाल

कुछ लोग
भूख से मर
रहे हैं,
कुछ
भूख के लिए
मर रहे हैं!
















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रोटी

रोटी की ज़िन्दगी
आज,
कितनी कम हो गई,
बनी,
तवे पर चढ़ी
और
ख़त्म हो गई!















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सिकन्दर

दुनिया को
जीतने की धुन में
फिर एक
सिकन्दर निकल गया है,
हर चीज में झंडा
मिलावट का
गड़ गया है!
















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सफलता

जाकर चाँद पर
आदमी,
मिट्टी ले आया है,
आज तक
आदमी, आदमी तक
नहीं पहुँच
पाया है!














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-रमेशकुमार भद्रावले

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