18 December 2005

शब्द प्राणायाम 12-16

12- कुर्सी

कुर्सी हमेशा
आदमी से बड़ी
होती है,
चूँकि
कुर्सी की
टाँगें चार
होती हैं!
















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13- बँटवारा


पानी की
एक बूँद का
जब विश्व में
बँटवारा किया गया,
कतार में
सबसे आगे
समुद्र,
पाया गया

















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14- कलियुग


मानवता के विघटन को
आदमी,
कलियुग कह रहा है,
ज्ञान के घोंसले में
आज,
स्वार्थ पल रहा है!















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15- समय


जब मैं पढ़ता था
तब,
पुस्तकें फाड़ा करता था,
आज
फटी किताबों में
नई,
ज़िन्दगी ढूँढ़ता हूँ!


















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16- दोस्ती


कृष्ण और सुदामा की
दोस्ती का सिलसिला
आज तक
चला आ रहा है,
दोस्ती में पानी भी
दूध के साथ मिलकर
दूध के भाव,
बिकता जा रहा है!

















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-रमेश कुमार भद्रावले
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5 comments:

गंभीर सिंह said...

Sir 16 chanikayen padh chuka hun.
Saral sahaj aur uttam.
Bahut sundar rachnaon k liye badhai.

M Patil said...

Bhahut sunder aadarniya Bhadrawaleji

M Patil said...

Bhahut sunder aadarniya Bhadrawaleji

M Patil said...

Bhahut sunder aadarniya Bhadrawaleji

M Patil said...

Bhahut sunder aadarniya Bhadrawaleji